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Diesel Purchase Rules: नए डीजल खरीद नियम से बढ़ी हाईराइज सोसायटियों की चिंता, बिजली संकट में खड़ी हो सकती है बड़ी समस्या

Market Newsly | Business & Infrastructure Desk

केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए डीजल खरीद नियम (Diesel Purchase Rules) ने गाजियाबाद की हाईराइज आवासीय सोसायटियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सरकार के ताजा आदेश के अनुसार अब थोक उपभोक्ता सामान्य रिटेल पेट्रोल पंपों से डीजल नहीं खरीद सकेंगे। इसके साथ ही एक उपभोक्ता को प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल ही उपलब्ध कराया जाएगा। इस डीजल खरीद नियम को लेकर हजारों फ्लैट मालिकों और सोसायटी प्रबंधन समितियों में चिंता का माहौल है।

200 लीटर सीमा बनी चिंता का कारण

हाईराइज सोसायटियों में लिफ्ट, पानी की आपूर्ति, कॉमन एरिया की लाइटिंग, फायर फाइटिंग सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था जैसे कई जरूरी कार्य डीजल जनरेटरों पर निर्भर रहते हैं। हाल के दिनों में गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों में आई तेज आंधी, बारिश और खराब मौसम के कारण कई इलाकों में घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रही थी।

ऐसे समय में डीजल जनरेटर ही निवासियों के लिए सबसे बड़ा सहारा साबित होते हैं। लेकिन नए डीजल खरीद नियम के तहत प्रतिदिन केवल 200 लीटर डीजल मिलने की सीमा ने सोसायटी प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

लंबे बिजली संकट में बढ़ सकती है परेशानी

विशेषज्ञों के अनुसार बड़ी हाईराइज सोसायटियों में लगे उच्च क्षमता वाले जनरेटर प्रति घंटे 60 से 70 लीटर तक डीजल की खपत करते हैं। यदि किसी क्षेत्र में 10 से 15 घंटे तक बिजली बाधित रहती है, तो हजारों लीटर डीजल की आवश्यकता पड़ सकती है।

ऐसे में नया डीजल खरीद नियम सोसायटियों के लिए संचालन संबंधी चुनौतियां पैदा कर सकता है। आरडब्ल्यूए और एओए पदाधिकारियों का कहना है कि आपातकालीन परिस्थितियों में डीजल की उपलब्धता सीमित होने से निवासियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

पंचशील प्रिमरोज और अन्य सोसायटियों में बढ़ी चिंता

गोविंदपुरम स्थित पंचशील प्रिमरोज सोसायटी में मेंटेनेंस एजेंसियों ने निवासियों को संभावित चुनौतियों के बारे में सूचित किया है। सोसायटी के एओए अध्यक्ष नीरज सिंह के अनुसार, यहां 500 केवीए क्षमता के दो बड़े जनरेटर स्थापित हैं, जो प्रति घंटे लगभग 80 से 85 लीटर डीजल की खपत करते हैं।

हाल ही में आए तूफान के दौरान करीब 15 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही थी। ऐसे हालात में यदि डीजल खरीद नियम के कारण पर्याप्त मात्रा में डीजल उपलब्ध नहीं हो पाया, तो लिफ्ट, जलापूर्ति और कॉमन एरिया की सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं।

वहीं राजनगर एक्सटेंशन स्थित केडीपी ग्रैंड सवाना सोसायटी के एओए अध्यक्ष राहुल बालियान ने बताया कि उनकी सोसायटी में छह बड़े डीजी जनरेटर लगे हुए हैं, जो प्रति घंटे 50 से 60 लीटर डीजल की खपत करते हैं। उनके अनुसार नया डीजल खरीद नियम लंबे बिजली संकट के दौरान सेवाओं को प्रभावित कर सकता है।

अलग श्रेणी की मांग कर रहे हैं सोसायटी प्रतिनिधि

नए डीजल खरीद नियम को लेकर एओए और आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन, तेल कंपनियों और केंद्र सरकार से विशेष व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि आवासीय हाईराइज सोसायटियों को सामान्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए।

प्रतिनिधियों का मानना है कि आंधी, वर्षा, प्राकृतिक आपदाओं और लंबे बिजली संकट के दौरान सोसायटियों के लिए डीजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु अलग नीति बनाई जानी चाहिए। इससे हजारों परिवारों को आवश्यक सेवाएं बिना किसी बाधा के मिलती रहेंगी।

क्या पड़ सकता है असर?

यदि भविष्य में डीजल खरीद नियम के तहत निर्धारित सीमाओं में कोई राहत नहीं दी जाती है, तो बड़े आवासीय परिसरों में बिजली कटौती के दौरान लिफ्ट, पानी और सुरक्षा जैसी मूलभूत सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और तेल कंपनियों को इस विषय पर आवासीय सोसायटियों के लिए विशेष समाधान पर विचार करना चाहिए।

Market Newsly इस मुद्दे से जुड़ी हर महत्वपूर्ण अपडेट और सरकारी फैसले पर अपनी नजर बनाए हुए है। आने वाले समय में यदि नियमों में कोई बदलाव होता है, तो हम आपको सबसे पहले जानकारी उपलब्ध कराएंगे।

Disclaimer: यह लेख विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। नियमों और नीतियों में समय-समय पर बदलाव संभव है। किसी भी आधिकारिक निर्णय या कार्रवाई से पहले संबंधित सरकारी विभाग या तेल कंपनी की आधिकारिक सूचना अवश्य जांचें।